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श्रीनगर बेस अस्पताल में भारी लापरवाही... आप भी पढ़े और शेयर करे

चार दिन पहले प्रदेश के पौड़ी जिले के श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने मातृत्व की महान भावना को भी शर्मसार कर दिया। एक मां ने अस्पताल के नेटल इंसेंटिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) के शौचालय में बच्ची को जन्म दिया और उसे वहीं तड़पता छोड़ कर गायब हो गई। अस्पताल प्रशासन को इस घटना का पता तब चला जब एक नर्स को बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। खून से लथपथ बच्ची को देख नर्स समझ गई कि उसका जन्म कुछ ही समय पहले हुआ है। बच्ची फिलहाल अस्पताल प्रशासन की देखरेख में स्वस्थ एवं सुरक्षित है, मगर सांस्कृतिक एवं शैक्षिक लिहाज से बेहद समृद्ध माने जाने वाले श्रीनगर में हुई इस घटना ने सभी को अंदर तक हिला कर रख दिया है। हर किसी के मन में यही बात चल रही है कि आखिर संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ की कोई मां कैसे इतनी अमानवीय हो सकती है कि अपनी नवजात बच्ची को शौचालय में जन्म देकर गायब हो जाए?
 बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि जिस महिला ने इस बच्ची को जन्म दिया वह बिन व्याही भी हो सकती है, और लोकलाज के चलते उसने ऐसा किया होगा। मगर सवाल यहां मातृत्व की उस भावना का है जो किसी महिला के मां बनते ही नैसर्गिक रूप से उसके मन में घर कर जाता है। सवाल यह भी है कि आज के इस दौर में जब तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, तब इस तरह की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं? इस पूरी घटना के भावनात्मक पहलुओं से इतर एक बड़ा सवाल अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही का भी है।
इस घटना को हुए चार दिन बीत जाने के बाद भी बच्ची की मां का पता नहीं लग पाया है। सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े अस्पताल में कैसे एक महिला सबको चकमा देकर भागने में कामयाब हो गई? क्या इसे बड़ी चूक नहीं माना जाना चाहिए। सुरक्षा के लिहाज से भी देखें तो यह वाकया अपने आप में अस्पताल प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही को उजागर करने वाला है। इस घटना से सबक लेकर अस्पलात प्रशासन ने इन चार दिनों में शायद ही कोई ठोस कदम उठाए होंगे।

श्रीनगर बेस अस्पताल की लापरवाही 

गढ़वाल छेत्र में श्रीकोट का बेस अस्पताल एक महतवपूर्ण अस्पताल हे, गढ़वाल के अधिकतर लोग गंभीर समस्या होने पर इसी अस्पताल की तरफ दौड़ते हे, परन्तु इस अस्पताल से हमेसा शिकायत ही आती हे, अधिकतर नवजात बच्चो के केस इसमें बिगड़ते रहते हैं, इसका मुख्य कारन बच्चो को जूनियर डॉक्टर्स के हवाले कर देना हैं, और सीनियर डॉक्टर की अपने काम के प्रति लापरवाही हैं, अस्पताल प्रशासन को बताना चाइये की उनके अस्पताल में कितने नवजात बच्चो की मृत्यु प्रति दिन हो रही हैं, और उसका मुख्य कारण डॉक्टरों और नर्सो की लापरवाही हैं, अगर आपके साथ भी इस अस्पताल में लापरवाही के कारण कोई हादसा हुआ हैं तो हमारा साथ दे और इस बात को पुरे उत्तराखंड में फैला दे, आखिर कब तक पहाड़ के सीधे साढ़े लोगो के बच्चो के साथ ये लोग खिलवाड़ करते रहेंगे, पहाड़ के लोगो के बच्चो की जिंदगी के साथ ये खिलवाड़ करते रहेंगे!

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