
उत्तराखंड में मंगलवार से कई विभागों में काम काज ठप पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि सातवें वेतनमान का लाभ ना मिलने से प्रदेश से करीब 80 हजार कर्मचारी नाराज हैं। निकाय, राज्य निगम, विकास प्राधिकरण, जल संस्थान और जिला पंचायत कर्मचारी मंगलवार से हड़ताल पर रहेंगे। बताया जा रहा है कि इससे समूचे उत्तराखंड में कई तरह की परेशानियां सामने आ सकती हैं। परिवहन और पेयजल समेत कई जरूरी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। कर्मचारी महासंघ ने मांग पूरी ना होने पर एक दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकाल तक आगे बढ़ाने की वॉर्निंग दी है। कर्मचारी महासंघ ने इससे पहले हरिद्वार रोड स्थित यूनियन कार्यालय में बैठक की थी। ये बैठक रविवार को की गई थी और इस दौरान आंदोलन की रणनीति तैयार की गई थी। अब आपको बताते हैं कि ये हड़ताल किस किस की होगी।
महासंघ के अध्यक्ष संतोष रावत का कहना है कि निकाय, राज्य निगम, विकास प्राधिकरण, जल संस्थान, पेयजल निगम, जिला पंचायत, जीएमवीएन, वन विकास निगम, रोडवेज इंप्लाइज यूनियन, केएमवीएन, अल्पसंख्यक कर्मचारी और बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम के कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर रहेंगे। उनका कहना है कि 15 सितंबर को मुख्य सचिव की महासंघ से बातचीत हुई थी। इस बातचीत में सहमति नहीं बन पाई थी। इस वजह से कर्मचारियों ने हड़ताल का फैसला लिया है। इसके साथ ही उनका कहना है कि हाई पावर कमेटी में जल संस्थान को वेतन आयोग का लाभ देने की संस्तुति के बाद भी कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं रखा गया है और इस वजह से ये नाराजगी जताई जा रही है। उधर रोडवेज इंप्लाइज यूनियन का कहना है कि परिवहन निगम का प्रस्ताव 3 सितंबर से लंबित पड़ा है।
रोडवेज इंप्लाइज यूनियन का कहना है कि इसके बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं किया जा रहा है। निकाय कर्मचारी महासंघ का भी कहना है कि पालिका,नगर निगम और परिषद के प्रस्ताव एक महीने से लटके पड़े हैं। उधर उत्तराखंड परिवहन निगम संयुक्त मोर्चा ने अपने आंदोलन को 15 दिनों के लिए टाला है। इस मोर्चे के संयोजक का कहना है कि 15 सितंबर को मुख्य सचिव से बातचीत हुई थी। इस बातचीत में 27 सितंबर को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में सातवें वेतनमान का प्रस्ताव स्वीकृत करने का आश्वासन दिया गया है। सरकार के इस आश्वासन के बाद से उन्होंने पांच अक्तूबर तक के लिए अपना आंदोलन टाल दिया है। लेकिन इतना जरूर है कि फिलहाल मंगलवार से कई संगठन हड़ताल पर होंगे। एक आंकड़ा कहता है कि करीब 80 हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे, जिससे कई समस्याएं सामने आ सकती हैं।
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