म्यामार भारत का मित्र है, म्यामार की सहमति से व म्यामार की सेना के साथ संयुक्त अभियान में भारतीय सेना ने बहुत ही बहादुरी से इन भारतद्रोहियों को मौत के घाट उतारा है। इसके लिए म्यामार, भारतीय सेना के साथ साथ भारतीय नेतृत्व को हार्दिक बधाई। भारतीय सेना के विशेष दल ने म्यामार में पेरासूट से उतर कर इन देशद्रोहियों का खासकर जिन्होंने इसी पखवाडे मणिपुर में भारतीय सेना के 18 जवानों को मौत के घाट उतारा था उनमें से कई आतंकियों का इस अभियान में सफाया किया। भारतीय सेना का यह अभियान देश व सेना का मनोबल बनाने के साथ साथ दुश्मनों की चूलें हिलाने वाला साबित होगा। इंदिरा गांधी के बाद पहली बार देश को मिले भारतीय नेतृत्व ने इस प्रकार का साहसिक कार्य करके देश का सम्मान बढ़ाया। नहीं तो अटल व मनमोहन सरकार में दुश्मन ने हमारी संसद, कारगिल, जहाज अपहरण, मुम्बई व अक्षरधाम में आतंकी हमला कराने का दुशाहस पाकिस्तान ने किया और भारत का तत्कालीन नपुंसक नेतृत्व ऐसे अमेरिका के संरक्षण में भारत पर हमला करने के दुशाहस करने के लिए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में असफल रहा।
इससे न केवल देश की सेनाओं व देशवासियों का मनोबल गिरा अपितु पूरे विश्व में भारत की जगहंसाई हुई। देश व सेना देश में इंदिरा गांधी की तरह मजबूत नेतृत्व को याद करने लगी जिसने पाकिस्तान को ही नहीं अपितु उसके संरक्षक बने अमेरिका की परवाह न करके पाकिस्तान के दो टूकडे कर दिये। इंदिरा गांधी से पाक इतना भयभीत रहा कि वह इंदिरा के होते भारत के साथ अटल व मनमोहन के कार्यकाल में किये गये हमले की सोच भी नहीं सकता।
इंदिरा गांधी ने न केवल भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाया। अपितु अमेरिका को भारत में पांव रखने की इजाजत नहीं दी। (अमेरिका की विशेष खुफिया ऐजेन्सी ‘एफबीआई’ को इंदिरा गांधी के शासनकाल में भारत में पांव रखने की इजाजत नहीं दी गयी। यह इजाजत वाजपेयी सरकार के दौरान मिली)। पाकिस्तान को भय रहा कि इंदिरा गांधी, बंग्लादेश की तरह पाकिस्तान के और टूकडे कराकर सिंध व बलूचीस्तान को भी आजाद देश बना सकती है।
बंगलादेश का बदला लेने के लिए ही पाक ने पंजाब आतंकबाद को फेलाया। अब आशा है मोदी भी इंदिरा गांधी की तरह देश के दुश्मनों को उसके ही घर में तबाह करने का मिशन बना कर भारत को सही अर्थो में महाशक्ति बनाने का काम करेंगे।

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