जून 2013 को केदारनाथ में आई भयंकर आपदा को 16-17 जून 2015 को दो साल पूरे हो जाएंगे, लेकिन केदारनाथ धाम में मलबे में दबे कंकाल फिर ढूंढे जा रहे हैं। चार दिन पहले केदारनाथ में मंदिर के पीछे मिले हाथ के पंजे के बाद से पुलिस और एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी है। मंदिर परिसर से तीन किमी के दायरे में कंकाल/शवों को ढूंढने का काम किया जा रहा है।
पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी विपिन चंद्र पाठक ने बताया कि केदारनाथ चौकी प्रभारी संदीप थपलियाल और एसडीआरएफ की टीम अभियान में जुटी है। रुद्रा प्वाइंट से लेकर मंदिर के पीछे बने हेलीपैड सहित मंदाकिनी नदी के किनारों को खंगाला जा रहा है। विदित हो कि बीते शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर के पीछे बहल आश्रम के समीप हाथ का एक पंजा दिखाया था।
कुछ तीर्थ पुरोहितों ने संभावना जताई है कि अब भी केदारनाथ में मलबे से पटे जर्जर भवनों के कमरों में कई शव और कंकाल दबे हुए हैं। उनकी खोजबीन नहीं की जा रही है। 16/17 जून 2013 को आई आपदा के बाद से बीते वर्ष तक भी केदारनाथ मंदिर परिसर व क्षेत्र में लगभग दो सौ मानव कंकाल बरामद हो चुके थे।
पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी विपिन चंद्र पाठक ने बताया कि केदारनाथ चौकी प्रभारी संदीप थपलियाल और एसडीआरएफ की टीम अभियान में जुटी है। रुद्रा प्वाइंट से लेकर मंदिर के पीछे बने हेलीपैड सहित मंदाकिनी नदी के किनारों को खंगाला जा रहा है। विदित हो कि बीते शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर के पीछे बहल आश्रम के समीप हाथ का एक पंजा दिखाया था।
कुछ तीर्थ पुरोहितों ने संभावना जताई है कि अब भी केदारनाथ में मलबे से पटे जर्जर भवनों के कमरों में कई शव और कंकाल दबे हुए हैं। उनकी खोजबीन नहीं की जा रही है। 16/17 जून 2013 को आई आपदा के बाद से बीते वर्ष तक भी केदारनाथ मंदिर परिसर व क्षेत्र में लगभग दो सौ मानव कंकाल बरामद हो चुके थे।


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