आज शाम सेलून शॉप में अखबार पड़ते पड़ते अचानक ही मुद्दा
MR. कजरी यानी हमारे प्रिय मुख्यमंत्री केजरीवाल पर आ गया, जहा एक तरफ वो स्वार्थी केजरी भक्त तो दूसरी तरफ में मामूली सा १५००० सैलरी पर गुजरा करने वाला! मुद्दा आया तो निगम की सफाई को लेकर था परन्तु वो भक्त ले गया कहीं ओर! मैने उस भक्त के सम्मुख न जाने कितनी दिल्ली की समस्यो को रखा, परन्तु वो केजरी के खिलाफ एक भी बात का समर्थन न करता हुआ पाया गया, जबकि उस व्यक्ति के घर के आगे ही कूड़े का अम्बार लगा हुआ था, फिर भ न जाने क्या बात हे इस केजरीवाल में की वो एक भी बात में उसकी आलोचना नहीं करना चाहता था! बातो ही बातो में उसका इस अटूट समर्थन का राज भी पता चल गया! वो था उसका पिछले महीने से आने वाला बिजली का बिल, जिसके कारण उसका केजरीवाल का अटूट समर्थन था, फिर मेरा माथा ठनका और मुह से निकला वाह! केजरीवाल आप तो छाए हुए हो दिळी के लोगो के बीच पर मेरा दिल दूसरी तरफ भी गया, जहाँ निगम के वो कूड़ा उठाने वाले लोग थे जिनकी पिछले तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिली, फिर मन में शंका हुई क्या ये कूड़ा उठाने वाले लोग दिल्ली में नहीं आते क्या! डीटीसी के बुजुर्ग ओर विधवाए जिनकी कजरी गैंग ने पेंशन तक रोक दी! भाई मेरी यदि १ महीने की तनख्वाह लेट हो जाई तो ऐसा लगता हे की में क्या बताऊ, ओर इनकी तो तीन महीने से नहीं मिली! कितनी लोगो को इस कारण अपने बच्चो की स्कूल फीस भरने के लिए उधार के लिए हाथ फैलाने पड़े होंगे ओर कितनी लोगो को भूखा सोना पड़ा होगा! फिर मन दूसरी ओर भी गया की दिल्ली की जनता का वोट इतना सस्ता हे क्या दिल्ली के लोग इतने मतलबी हे, कि सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी का भी समर्थन कर देते हे! कल अगर IS वाले आके यह चुनाव लड़े और ख दे सबको बीवी फ्री दी जाएगी तो निश्चित IS सब पार्टियो पर भरी पद जाएगा! इतनी स्वार्थ जनता हे दिल्ली कि इस एक व्यक्ति कि मानसिकता से तो ऐसा ही लगता है! चलो आगे देखते हे सायद केजरी अपनी लड़ाई के बाद उन निगम और गरीब लोगो कि दिल्ली के बारे में भी सोचेंगे जिन्हे सुबह उठकर पानी के लिए लाइन यह लग्न पड़ता हे और घुस देकर पानी के टेंकर को बुलाना पड़ता है!
जय हो केजरी भक्तो कि! इतने भी स्वार्थी मत बनो !
MR. कजरी यानी हमारे प्रिय मुख्यमंत्री केजरीवाल पर आ गया, जहा एक तरफ वो स्वार्थी केजरी भक्त तो दूसरी तरफ में मामूली सा १५००० सैलरी पर गुजरा करने वाला! मुद्दा आया तो निगम की सफाई को लेकर था परन्तु वो भक्त ले गया कहीं ओर! मैने उस भक्त के सम्मुख न जाने कितनी दिल्ली की समस्यो को रखा, परन्तु वो केजरी के खिलाफ एक भी बात का समर्थन न करता हुआ पाया गया, जबकि उस व्यक्ति के घर के आगे ही कूड़े का अम्बार लगा हुआ था, फिर भ न जाने क्या बात हे इस केजरीवाल में की वो एक भी बात में उसकी आलोचना नहीं करना चाहता था! बातो ही बातो में उसका इस अटूट समर्थन का राज भी पता चल गया! वो था उसका पिछले महीने से आने वाला बिजली का बिल, जिसके कारण उसका केजरीवाल का अटूट समर्थन था, फिर मेरा माथा ठनका और मुह से निकला वाह! केजरीवाल आप तो छाए हुए हो दिळी के लोगो के बीच पर मेरा दिल दूसरी तरफ भी गया, जहाँ निगम के वो कूड़ा उठाने वाले लोग थे जिनकी पिछले तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिली, फिर मन में शंका हुई क्या ये कूड़ा उठाने वाले लोग दिल्ली में नहीं आते क्या! डीटीसी के बुजुर्ग ओर विधवाए जिनकी कजरी गैंग ने पेंशन तक रोक दी! भाई मेरी यदि १ महीने की तनख्वाह लेट हो जाई तो ऐसा लगता हे की में क्या बताऊ, ओर इनकी तो तीन महीने से नहीं मिली! कितनी लोगो को इस कारण अपने बच्चो की स्कूल फीस भरने के लिए उधार के लिए हाथ फैलाने पड़े होंगे ओर कितनी लोगो को भूखा सोना पड़ा होगा! फिर मन दूसरी ओर भी गया की दिल्ली की जनता का वोट इतना सस्ता हे क्या दिल्ली के लोग इतने मतलबी हे, कि सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी का भी समर्थन कर देते हे! कल अगर IS वाले आके यह चुनाव लड़े और ख दे सबको बीवी फ्री दी जाएगी तो निश्चित IS सब पार्टियो पर भरी पद जाएगा! इतनी स्वार्थ जनता हे दिल्ली कि इस एक व्यक्ति कि मानसिकता से तो ऐसा ही लगता है! चलो आगे देखते हे सायद केजरी अपनी लड़ाई के बाद उन निगम और गरीब लोगो कि दिल्ली के बारे में भी सोचेंगे जिन्हे सुबह उठकर पानी के लिए लाइन यह लग्न पड़ता हे और घुस देकर पानी के टेंकर को बुलाना पड़ता है!
जय हो केजरी भक्तो कि! इतने भी स्वार्थी मत बनो !


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