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उत्तराखंड के लिए बड़ी खबर, मसूरी में इस दिन ढहेगा सचिन तेंदुलकर का आशियाना !


ये बात तो आपको पता ही होगी कि मसूरी में जिस आशियाने में सचिन तेंदुलकर रहा करते हैं। वो आशियाना ढहने जा रहा है। सचिन तेंदुलकर जब भी उत्तराखंड घूमने के लिए आते हैं, तो इस बंगले में रहते हैं। लेकिन सचिन के दोस्त संजय नारंग का या बंगला कई विवादों में घिर चुका है। इस बंगले का नाम है डहलिया बैंक परिसर। इस परिसर में किया गया अवैध निर्माण अलगे महीने यानी अक्टूबर में ध्वस्त होगा। बताया जा रहा है कि 15 या फिर 16 अक्टूबर को यहां बुलडोजर चलेगा। ये फैसला लंढौर कैंटबोर्ड की बैठक में लिया गया।ये बंगला 28 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला है। संजय नारंग ने कैंट बोर्ड की अनुमति के बगैर यहां काफी अवैध निर्माण कर डाला है।जब भी सचिन मसूरी आते हैं तो अपने नजदीकी मित्र संजय नारंग के ढहलिया बैंक हाउस में रहते हैं। इस वजह से इसे सचिन का आशियाना कहा जाने लगा था। लेकिन अब हाईकोर्ट ने इसे ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया है कि ये अवैध निर्माण है। ढहलिया बैंक हाउस संजय नारंग का है। सचिन जब भी मसूरी में छुट्टियां मनाने आते हैं तो यहीं ठहरते हैं। संजय नारंग की ओर से हाईकोर्ट में विशेष अपील की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड मसूरी को ढहलिया बैंक के पूल और तालाब के मामले में दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायाधीश वीके बिष्ट की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। उनका कहना है कि पूल और तालाब को छोड़कर बाकी निर्माण को ध्वस्त किया जाए। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण को सही माना और विशेष अपील खारिज कर दी। सिर्फ पूल और तालाब के संबंध में कैंट बोर्ड में फिर से सुनवाई होगी। आपको बता दें कि ढहलिया बैंक हाउस को लेकर खुद सचिन तेंदुलकर भी विवादों में आ चुके हैं। 2016 में सचिन तेंदुलकर विवादों में फंस गए थे। उन पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से सिफारिश लगाने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में उन्होंने खद ही इस पर सफाई भी दी थी। उनका कहना था कि इस प्रॉपर्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद सचिन ने कहा था कि उन्होंने रक्षा मंत्री से सिर्फ इस बारे में हल निकालने की गुजारिश की थी। आपको बता दें कि संजय नारंग ने ढहलिया बैंक को आरएल दुग्गल से खरीदा था। इसके बाद संजय ने रक्षा संस्थान से इसके निर्माण के लिए NOC मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। बाद में मरम्मत के नाम पर इसका भव्य निर्माण हुआ है। इस बंगले के पास महत्वपूर्ण रक्षा संस्थान आईटीएम है। छावनी और रक्षा संपदा के नियमों के मुताबिक इसके 50 मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता। यहां मरम्मत के लिए भी रक्षा संस्थान से NOC लेना जरूरी है।

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