राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के केदारनाथ पूजा के बाद पुरोहित ने दक्षिणा में ऐसा कुछ मांग लिया कि जिसे सुनकर राष्ट्रपति भी हैरान हो गये। इसी पूजा के बाद दिल छू ले वाला वक्या सामने आया। राष्ट्रपति कोविंद की इस पूजा के तीर्थपुरोहित भगत बगवाड़ी को नियुक्त किया गया था। जिन्होने राष्ट्रपति से दक्षिणा में कर्नल कोठियाल के लिए ‘सम्मान की दक्षिणा’ की मांग कर दी। आपको बता दे कि कर्नल कोठीयाल वहीं नाम है जिसने आपदा के बाद यात्रा मार्गो को दुरुस्त कराने में अहम रोल अदा किया था। केदारनाथ में राष्ट्रपति की विशेष पूजा तीर्थपुरोहित भगत बगवाड़ी ने संपंन कराई।
दरअसल, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की रुद्राभिषेक और अन्य विशेष पूजा के लिए तीर्थपुरोहित भगत बगवाड़ी को नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति ने अपने परिवार के साथ केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में करीब 25 मिनट तक पूजा कर भोलेनाथ का महाभिषेक किया। पूजा संपंन होने के बाद राष्ट्रपति ने पुजारी भगत बगवाड़ी को दक्षिणा दी तो उन्होंने दक्षिणा लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। अगर आप कुछ देना चाहते हैं तो कर्नल अजय कोठियाल को ‘सम्मान की दक्षिणा’ दो। जिनकी बदौलत केदारनाथ की यात्रा निर्बाध रूप से संचालित हो रही हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि केदारनाथ की यात्रा शुरू होने में कई साल लग जाते, लेकिन कर्नल कोठियाल की जीजिवीषा और समर्पण के कारण यात्रा आपदा के चंद माह में ही शुरू हो गई। आपदा से ध्वस्त हो चुके केदारपुरी का आज पुनर्निर्माण हो चुका है। कर्नल कोठियाल की वजह से ही हम जैसे हजारों लोगों को रोजगार मिला है। आपदा के दौरान उत्तरकाशी में उनके नेतृत्व में निम की टीम ने हजारों लोगों को बचाया। इसलिए कर्नल कोठियाल सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। राष्ट्रपति ने पुजारी की बात गंभीरता सुनी और वह मंदिर से बाहर आ गए।
इससे पूर्व राष्ट्रपति के केदारनाथ पहुंचते ही निम के सोनप्रयाग प्रभारी मनोज सेमवाल ने उनकी अगुवाई की। उन्होंने श्री सेमवाल को केदारनाथ के मौसम और तापमान के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही निम के केदारनाथ प्रभारी देवेन्द्र बिष्ट ने परंपरा निभाते हुए राष्ट्रपति को ऑल टैरेन व्हेकिल (एटीवी) के जरिए हेलीपैड से मंदिर परिसर और परिसर से वापस हेलीपैड तक पहुंचाया। इस दौरान राष्ट्रपति की बिष्ट से करीब आठ मिनट बातचीत हुई।
दरअसल, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की रुद्राभिषेक और अन्य विशेष पूजा के लिए तीर्थपुरोहित भगत बगवाड़ी को नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति ने अपने परिवार के साथ केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में करीब 25 मिनट तक पूजा कर भोलेनाथ का महाभिषेक किया। पूजा संपंन होने के बाद राष्ट्रपति ने पुजारी भगत बगवाड़ी को दक्षिणा दी तो उन्होंने दक्षिणा लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। अगर आप कुछ देना चाहते हैं तो कर्नल अजय कोठियाल को ‘सम्मान की दक्षिणा’ दो। जिनकी बदौलत केदारनाथ की यात्रा निर्बाध रूप से संचालित हो रही हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि केदारनाथ की यात्रा शुरू होने में कई साल लग जाते, लेकिन कर्नल कोठियाल की जीजिवीषा और समर्पण के कारण यात्रा आपदा के चंद माह में ही शुरू हो गई। आपदा से ध्वस्त हो चुके केदारपुरी का आज पुनर्निर्माण हो चुका है। कर्नल कोठियाल की वजह से ही हम जैसे हजारों लोगों को रोजगार मिला है। आपदा के दौरान उत्तरकाशी में उनके नेतृत्व में निम की टीम ने हजारों लोगों को बचाया। इसलिए कर्नल कोठियाल सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। राष्ट्रपति ने पुजारी की बात गंभीरता सुनी और वह मंदिर से बाहर आ गए।
इससे पूर्व राष्ट्रपति के केदारनाथ पहुंचते ही निम के सोनप्रयाग प्रभारी मनोज सेमवाल ने उनकी अगुवाई की। उन्होंने श्री सेमवाल को केदारनाथ के मौसम और तापमान के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही निम के केदारनाथ प्रभारी देवेन्द्र बिष्ट ने परंपरा निभाते हुए राष्ट्रपति को ऑल टैरेन व्हेकिल (एटीवी) के जरिए हेलीपैड से मंदिर परिसर और परिसर से वापस हेलीपैड तक पहुंचाया। इस दौरान राष्ट्रपति की बिष्ट से करीब आठ मिनट बातचीत हुई।


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