पहाड़ों में इस वक्त रोजगार और पलायन सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। अब सवाल ये है कि आखिर इस पलायन और इस बेरोजगारी को कैसे थामा जाए ? इन सवालों के बीच किसी को जवाब मिल या ना मिले, लेकिन गांव की महिलाओं ने तो इसका उपाय ढूंढ ही लिया है। जी हां हम बात कर रहे हैं चमोली जिले के सीमांत नगर जोशीमठ की। यहां 6 साल पहले एक महिला ने बरोजगारी के खिलाफ खुद ही मुहिम छेड़ दी थ थी। आज ये महिम आंदोलन का रूप ले चुकी है। एक महिला ने 6 साल पहले अकेल ही चौलाई के लड्डू बनेन का काम शुरू किया। आज इस महिला को 50 और महिलाओं का साथ मिल चुका है। हम बार बार कहते हैं कि अगर एक रास्ता बंद होता है तो आपके सामने 100 रास्ते खुलते हैं। रोजगार ढूंढिए मत, पैदा करने की कुव्वत रखिए, तभी आगे बढ़ेंगे और जीवन में सफल हो पाएंगे।
गांव की इन महिलांओं द्वारा तैयार इन लड्डुओं को देश-दुनिया के यात्री हाथों हाथ खरीद रहे हैं। सबसे पहली बात ये है कि अन्य मिठाइयों के मकाबले इनका दाम कम है। दूसरी सबस बड़ी बात ये है कि ये लड्डू पौष्टिक होते हैं और स्वास्थ्य क लिए लाभदायक होते हैं। स्थानीय उत्पाद से बने होने के कारण इन लडडुओं की बाजार में भी मांग बढ़ी है। आपको बता दें कि जोशमठ में काफी मात्रा में चौलाई होता है। यहां की महिलाओं नेइसे ही रोजगार के साधन का जरिया बना दिया। एक रिपोर्ट बताती है कि जोशीमठ में हर साल करीब 500 टन चौलाई का उत्पादन किया जाता है। स्थानीय स्तर पर इसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होता है। इस वजह स लोग बिचौलियों को औने-पौने दाम में अपनी फसल बेच देते हैं। ये सब गांव की ही महिला धर्मा देवी ने देखा, तो न्होंने अपने मन में कछ अलग करने की ठान ली।
2012 में धर्मा देवी ने चौलाई का उपयोग और इससे स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में पहल की। धर्मा देवी को स्वयं सेवी संस्था हैस्को द्वारा स्थानीय उत्पादों पर उद्योग लगाने की प्रेरणा मिली थी। धर्मा देवी ने सबसे पहले अपने घर पर ही चौलाई के लड्डू बनाना शुरू कर दिया। धर्मा देवी ने इसके बाद इसे स्थानीय बाजार में बेचना शुरू किया। परिणाम अच्छे मिले तो बदरीनाथ धाम आने वाले यात्रियों को प्रसाद के रूप में चौलाई के लड्डू परोसने की मुहिम शुरू हुई। धर्मा देवी ने इसके बाद जय बदरी विशाल स्वयं सहायता समूह गठित कर दिया। अब धर्मा देवी के साथ 50 से ज्यादा परिवार चौलाई के लड्डू बनाने में जुटे हैं। इन परिवारों की महिलाएं लड्डू तैयार करती हैं और उन्हें बदरीनाथ धाम में प्रसाद की दुकानों तक भेजती हैं। 250 रपये किलो में वो ये लड्डू बेचती हैं। इस बार इन महिलाओं को 2.5 लाख रुपये का शुद्ध मनाफा हुआ है।


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